हैदराबाद में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद मेमोरियल पर शुरू हुई चर्चा
तहरीक मुस्लिम शब्बन के प्रेसिडेंट बोले- बाबर के नाम से परेशान नहीं होना चाहिए
हैदराबाद। तहरीक मुस्लिम शब्बन ने ग्रेटर हैदराबाद में बाबरी मस्जिद मेमोरियल और वेलफेयर इंस्टीट्यूशन बनाने के प्लान का ऐलान किया है। यह फैसला मस्जिद गिराए जाने की 33वीं बरसी पर बाद लिया गया। संस्था के प्रेसिडेंट मुश्ताक मलिक ने कहा हम जल्द ही ऐलान करेंगे कि यह कैसे और कितने समय में बनाया जाएगा।
मलिक ने कहा कि बाबर के नाम से किसी को परेशान नहीं होना चाहिए, उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा पॉलिटिकल प्रोपेगैंडा है। इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस के सस्पेंड विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के निर्माण की नींव रखी है। कबीर ने दावा किया कि वह कुछ भी गैर-कानूनी नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, कोई भी मंदिर बना सकता है, कोई भी चर्च बना सकता है। मैं मस्जिद बनाऊंगा।
तुलसी की रामचरित मानस में जिक्र नहीं
तहरीक मुस्लिम शब्बन के प्रेसिडेंट ने आरोप लगाया कि अगर हम तुलसीदास की रामायण देखें, तो वह बाबरी मस्जिद बनने के 60 साल बाद लिखी गई थी। उस रामायण में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि राम मंदिर तोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि बाबर के बाद हुमायूं का राज आया, और उसके बाद अकबर का। अकबर के महल में रस्में और प्रार्थनाएं होती थीं। जोधाबाई अकबर के महल में थीं। रस्में, प्रार्थनाएं और हवन होते थे। उस समय तुलसीदास भी जिंदा थे। अकबर के समय में, तुलसीदास अकबर से बात कर सकते थे। मान सिंह उस समय आर्मी चीफ थे। वह उनसे पूछ सकते थे। ऐसी बात तुलसी दास की रामायण में नहीं आती है। मलिक ने यह भी आरोप लगाया कि यह देश को बांटने के लिए पॉलिटिकल प्रोपेगैंडा है। इससे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और दलितों के बीच जो भाईचारा था, वह टूट गया है, और नफरत के बीज बोए गए हैं।
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