यूरोपीय परिषद ने दी मंजूरी, FTA को अंतिम रूप देने की दिशा में बढ़ा EU-भारत सहयोग
व्यापार: यूरोपीय परिषद ने 'न्यू स्ट्रैटेजिक ईयू-इंडिया एजेंडा' को मंजूरी दे दी है। इसे हाल ही में यूरोपीय आयोग ने पेश किया था। सोमवार को मंजूरी मिलने के बाद परिषद ने इसे सकारात्मक पहल बताया। इस पहल का स्वागत करते हुए परिषद ने कहा, इससे भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच संबंधों को नई गति मिलेगी। परिषद के बयान में कहा गया, भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) संतुलित, महत्वाकांक्षी और परस्पर लाभकारी होना चाहिए। परिषद ने कहा कि समझौते में बाजार तक पहुंच बढ़ाने, व्यापार बाधाओं को हटाने और सतत विकास से संबंधित प्रावधानों को भी शामिल किया जाए।
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता इस साल के अंत तक
गौरतलब है कि 'न्यू स्ट्रैटेजिक ईयू-इंडिया एजेंडा' द्विपक्षीय सहयोग को समृद्धि और सतत विकास, प्रौद्योगिकी और नवाचार, सुरक्षा और रक्षा, संपर्कता तथा वैश्विक मुद्दों के क्षेत्रों में मजबूत करने पर केंद्रित है। परिषद ने एजेंडे को मंजूरी मिलने के बाद कहा, विशेष रूप से भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को वर्ष के अंत तक पूरा करने के प्रयास सराहनीय हैं।
आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित सहयोग
परिषद की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग भी बेहद महत्वपूर्ण है। बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत और ईयू के बीच आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित रक्षा सहयोग जरूरी है। दोनों पक्षों के बीच आने वाले समय में सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी के साथ-साथ रक्षा उद्योग सहयोग पर भी सहमति बनने की संभावना है।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था के आधार पर काम
रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में यूरोपीय परिषद ने कहा कि ईयू भारत के साथ इस मुद्दे पर संवाद जारी रखेगा। परिषद के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार ढांचे की रक्षा करना दोनों पक्षों की साझा जिम्मेदारी है।
ईयू-भारत संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की पहल
परिषद ने लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों, तथा महिलाओं व बच्चों के अधिकारों की रक्षा को इस रणनीतिक एजेंडा का अभिन्न हिस्सा बताया। बता दें कि यह निर्णय इसी साल फरवरी में भारत में ईयू कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स की ऐतिहासिक यात्रा के बाद हुआ है। इसे ईयू-भारत संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की नींव की तरह देखा जा रहा है।
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