सोना और शेयर बाजार: निवेशकों के लिए किसने दिया है सबसे अच्छा रिटर्न?
सोने ने बीते कुछ सालों में सेफ, स्थिर और बेहतर रिटर्न दिया है. कोविड के बाद से ही स्टॉक मार्केट में जितना अच्छा बुल रन (तेजी का दौर) देखा गया, उतना ही खतरनाक बीयर स्लंप (गिरावट का रुख) भी देखने को मिला है. ऐसे में क्या सोना आगे भी बढ़िया रिटर्न देता रहेगा या स्टॉक मार्केट उसे पछाड़ देगा?. देश की टॉप म्यूचुअल फंड कंपनियों में से एक एडेलवाइस म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आने वाले 3 साल में स्टॉक मार्केट का रिटर्न सोने के रिटर्न को मात दे देगा. इस रिपोर्ट में शेयर बाजार के आउट परफॉर्म करने की वजह भी बताई गई है.
आखिर क्यों शेयर बाजार देगा गोल्ड को मात?
रिपोर्ट में अंडरलाइन किया गया है कि जहां सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश का ऑप्शन रहा है. अनिश्चितता के समय इसमें निवेश बढ़ता है और रिटर्न भी बेहतर होता है. वहीं शेयर बाजार का रिटर्न बहुत हद तक इकोनॉमिक ग्रोथ पर डिपेंड करता है. इस वजह से स्टॉक मार्केट एक बेहतर निवेश विकल्प बन जाता है. हिस्टोरिकल डेटा को देखें तो जब-जब दुनिया में इकोनॉमिक एक्सपेंशन होता है. तब-तब शेयर मार्केट का तेजी से विस्तार होता है. इसकी वजह उस दौर में कॉरपोरेट की कमाई बढ़ती है और उसकी वजह से उनके शेयर की वैल्यू. इसका फायदा निवेशकों को मिलता है और वह बेहतर रिटर्न हासिल कर पाते हैं.
चौथी औद्योगिक क्रांति का दौर
एडेलवाइस म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट में कही गई बात को अगर रियल लाइफ में लागू करके देखें, तो कुछ उदाहरण से आप इसे बखूबी समझ सकते हैं…
- साल 1991 के दौर में जब भारत की इकोनॉमी ग्लोबलाइजेशन के दौर में आई तब शेयर मार्केट में नए इनोवेशन होने शुरू हुए. उस दौर में मार्केट के लूप होल्स ढूंढकर लोगों ने तेजी से पैसा कमाया. हर्षद मेहता, राकेश झुनझुनवाला, राधाकिशन दमानी और केतन पारेख जैसे नाम उसी दौर में चर्चा में आए. इस इकोनॉमिक एक्सपेंशन की वजह से ही SEBI को मजबूती मिली और फिर ये इंवेस्टर्स की सबसे बड़ी प्रोटेक्टर संस्था बनकर सामने आई.
- इसके बाद 2008 की मंदी का दौर याद कीजिए. ग्लोबल इकोनॉमी के धराशायी होने के बावजूद इंडियन इकोनॉमी में डिमांड बनी रही. हालांकि उस साल सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट क्रैश देखने को मिला, लेकिन 2009 में ही सेंसेक्स ने रिकवरी कर ली. एक खबर के मुताबिक साल 2000 के बाद 2009 लोगों के लिए रिटर्न के लिहाज से सबसे बढ़िया साल रहा. ये वो दौर था जब इंडियन कॉरपोरेट्स ने अपनी ग्लोबल पहचान बनानी शुरू की. Tata Group ने कोरस और जगुआर लैंड रोवर जैसी कंपनियों के अधिग्रहण इसी दौर में किए. ये भारतीय इकोनॉमी का नया एक्सपेंशन था और शेयर बाजार ने वैसा ही रिटर्न दिया.
- फिर 2020 के बाद कोविड के आए दौर को देखें. इस दौरान डिजिटल क्रांति आई और इस सेगमेंट में काम करने वाली कंपनियों का ना सिर्फ विकास हुआ, बल्कि उनकी कमाई भी बढ़ी. रिलायंस जियो इसका सबसे बढ़िया उदाहरण है. वहीं डिजिटल टेक कंपनियों के लगातार आए IPOs ने मार्केट को बुलिश बनाए रखा. वहीं लॉकडाउन खुलने के बाद लोगों के अंदर घूमने से लेकर बाहर खाने तक का क्रेज बढ़ा, जिससे रिटेल इंडस्ट्री ने ग्रोथ के नए पैरामीटर सेट किए.
- अब मार्केट एक बार फिर नए एक्सपेंशन की ओर बढ़ रहा है. इसमें सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सस्टेनबिलिटी प्रोडक्ट और आर्टफिशियल इंटेलीजेंस बड़ी भूमिका अदा करने वाले हैं. ये चौथी औद्योगिक क्रांति है, जो एक दो साल में स्टेबल हो सकती है. इसलिए अगले 3 साल में स्टॉक मार्केट बेहतर परफॉर्मेंस दे, इसकी पूरी-पूरी संभावना है.
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