स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा एक्शन, कई डॉक्टरों की सेवा समाप्त
अमरावती: आंध्र प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक, बिना सूचना गायब रहने वाले 51 डॉक्टरों को सेवा से किया बर्खास्त
आंध्र प्रदेश की स्वास्थ्य प्रणाली में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि चिकित्सा शिक्षा निदेशक (डीएमई) के अधीन कार्यरत 51 डॉक्टरों को उनके पदों से स्थायी रूप से हटा दिया गया है। ये सभी डॉक्टर बिना किसी पूर्व सूचना या वैध कारण के लंबे समय से अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे थे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चिकित्सा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह कार्रवाई राज्य के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए की गई है।
कई वर्षों से ड्यूटी से नदारद थे एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर
बर्खास्त किए गए चिकित्सा अधिकारियों के विवरण से पता चलता है कि इनमें 8 एसोसिएट प्रोफेसर, 41 असिस्टेंट प्रोफेसर और 2 ट्यूटर शामिल हैं। जांच में यह तथ्य सामने आया कि इनमें से अधिकांश डॉक्टर अपने व्यक्तिगत व्यावसायिक हितों और निजी प्रैक्टिस के कारण सरकारी कर्तव्यों की अनदेखी कर रहे थे। कुछ मामलों में तो अनुपस्थिति का समय बेहद चौंकाने वाला है, जहां एक ट्यूटर पिछले सात वर्षों से ड्यूटी पर नहीं आया था, वहीं आंध्र मेडिकल कॉलेज का एक एसोसिएट प्रोफेसर फरवरी 2020 से ही लापता था। इन डॉक्टरों की अनुपस्थिति से न केवल मरीजों की देखभाल प्रभावित हो रही थी, बल्कि मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक कार्यों पर भी बुरा असर पड़ रहा था।
कड़े नियमों के तहत की गई कार्रवाई और नोटिस का नहीं मिला जवाब
सरकार ने इन डॉक्टरों के विरुद्ध आंध्र प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम-1964 के सख्त प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है, जो प्रशासन को यह अधिकार देता है कि यदि कोई कर्मचारी एक वर्ष से अधिक समय तक बिना सूचना अनुपस्थित रहता है, तो उसे स्वतः ही इस्तीफा दिया हुआ मान लिया जाए। बर्खास्तगी से पहले विभाग ने सभी संबंधित डॉक्टरों को स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर प्रदान किया था। इसके बावजूद, डॉक्टरों की ओर से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया या कार्य पर लौटने की सूचना प्राप्त नहीं हुई, जिसके बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें सेवामुक्त करने का अंतिम निर्णय लिया।
अन्य अनुपस्थित डॉक्टरों को अल्टीमेटम और स्वास्थ्य क्षेत्र में नई नियुक्तियों पर जोर
कड़ा संदेश देने के बाद विभाग में सक्रियता देखी गई है और नोटिस मिलने के बाद कुछ प्रोफेसरों और 11 अन्य डॉक्टरों ने अपनी ड्यूटी दोबारा संभाल ली है। हालांकि, अभी भी 33 डॉक्टर ऐसे हैं जो कार्यस्थल पर नहीं लौटे हैं और यदि उनकी अनुपस्थिति एक वर्ष की अवधि पार करती है, तो उन्हें भी अनिवार्य बर्खास्तगी का सामना करना पड़ेगा। स्वास्थ्य मंत्री ने दोहराया कि सरकार 'शून्य रिक्ति नीति' पर काम कर रही है ताकि सरकारी संस्थानों में डॉक्टरों के रिक्त पदों को तत्काल भरा जा सके। सरकार का अंतिम लक्ष्य राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को इतना कुशल और पारदर्शी बनाना है कि हर गरीब मरीज को समय पर और विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके।
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