डायबिटीज से जुड़ी भ्रांतियां और सच: समझिए और सतर्क रहिए
डायबिटीज से जुड़ी ये 5 बातें जान लीं तो आधी परेशानी खुद-ब-खुद हो जाएगी दूर
नई दिल्ली:
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज (मधुमेह) से पीड़ित हैं, जबकि 13 करोड़ से ज्यादा लोग प्री-डायबिटिक की श्रेणी में आते हैं। यानी आने वाले समय में ये लोग भी डायबिटीज के शिकार हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी जितनी गंभीर है, उतनी ही रोकथाम योग्य भी है — बशर्ते इसके बारे में सही जानकारी और सतर्कता हो। आइए जानते हैं डायबिटीज से जुड़ी 5 जरूरी बातें, जिन्हें समझ लेने से आप इस बीमारी से काफी हद तक बच सकते हैं।
1. डायबिटीज क्या है? – इसे समझना सबसे जरूरी
डायबिटीज एक मेटाबॉलिक (चयापचय संबंधी) विकार है। इसमें शरीर इंसुलिन हार्मोन का निर्माण नहीं कर पाता या बना हुआ इंसुलिन शरीर में सही तरीके से काम नहीं कर पाता। इंसुलिन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक होता है। इसके न बनने या काम न करने पर खून में शुगर का स्तर बढ़ जाता है।
2. डायबिटीज के प्रकार – सिर्फ टाइप-2 नहीं, चार तरह की होती है यह बीमारी
टाइप-1 डायबिटीज: एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पैंक्रियास की कोशिकाओं पर हमला कर देती है।
टाइप-2 डायबिटीज: सबसे सामान्य प्रकार, जिसमें शरीर इंसुलिन बनाता है लेकिन उसे ठीक से उपयोग नहीं करता।
जेस्टेशनल डायबिटीज: गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज जो मां और बच्चे दोनों के लिए भविष्य में खतरा बढ़ा सकती है।
LADA (टाइप-1.5): वयस्कों में होने वाली ऑटोइम्यून डायबिटीज, जिसमें टाइप-1 और टाइप-2 दोनों के लक्षण होते हैं।
3. पहचानिए डायबिटीज के शुरुआती लक्षण
कई बार डायबिटीज के संकेत मामूली लगते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। जैसे: बार-बार प्यास लगना और पेशाब आना , बार-बार थकान महसूस होना ,वजन अचानक घटना , धुंधला दिखना , त्वचा पर बार-बार संक्रमण या घाव का देर से भरना
4. डायबिटीज की जांच कैसे होती है?
डायबिटीज का पता कुछ सामान्य जांचों से लगाया जा सकता है: फास्टिंग ब्लड शुगर: अगर 126 mg/dL या उससे अधिक है तो यह डायबिटीज की ओर इशारा करता है। पोस्ट-प्रांडियल (खाने के बाद) ब्लड शुगर: अगर यह 200 mg/dL या उससे अधिक है, तो यह भी डायबिटीज का संकेत हो सकता है।
5. क्या डायबिटीज से बचा जा सकता है?
टाइप-1 डायबिटीज से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है क्योंकि यह आनुवांशिक या ऑटोइम्यून कारणों से होता है।लेकिन टाइप-2 डायबिटीज से बचाव पूरी तरह संभव है — यदि आप कुछ आदतें बदल लें:
रोजाना 30-45 मिनट की वॉक या व्यायाम , वजन नियंत्रित रखना , शुगर और प्रोसेस्ड फूड से दूरी , फाइबर और प्रोटीन से भरपूर डाइट , करेला, मेथी, जामुन के बीज, गिलोय, नीम जैसी प्राकृतिक चीजें रक्त शर्करा को संतुलित करने में मदद कर सकती हैं (हालांकि ये दवा का विकल्प नहीं हैं)
निष्कर्ष:
डायबिटीज एक जानलेवा लेकिन नियंत्रण योग्य बीमारी है। समय रहते इसके लक्षणों को पहचानें, नियमित जांच कराएं और अपनी जीवनशैली में जरूरी बदलाव लाकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।
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