अमरीका-ईरान संघर्ष में UAE की एंट्री का दावा, रिपोर्ट्स ने बढ़ाई चिंता
वाशिंगटन। खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अप्रैल की शुरुआत में ईरान पर गुप्त रूप से हवाई हमले किए थे। यह कार्रवाई उस समय की गई थी जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम (सीजफायर) की घोषणा हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई की वायु सेना ने फारस की खाड़ी में स्थित लावान द्वीप की एक तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया था।
यूएई के हमलों का रहस्य और ईरानी तेल कंपनी का बयान
अप्रैल के पहले हफ्ते में यूएई ने हमलों की एक सीरीज को अंजाम दिया। दिलचस्प बात यह है कि उस समय न तो ईरान ने हमलावर देश का नाम सार्वजनिक किया और न ही यूएई ने आधिकारिक तौर पर इसकी जिम्मेदारी ली। हालांकि, 8 अप्रैल को राष्ट्रीय ईरानी तेल शोधन और वितरण कंपनी ने स्वीकार किया था कि लावान द्वीप पर उनके तेल संयंत्रों पर "दुश्मन" द्वारा हमला किया गया है। अब इस नई रिपोर्ट ने उन हमलों के पीछे यूएई का हाथ होने का दावा कर मामले को नया मोड़ दे दिया है।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया और अमेरिकी रुख
इस खुलासे पर यूएई के विदेश मंत्रालय ने कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है। मंत्रालय ने केवल इतना कहा कि देश के पास अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का सैन्य बल के साथ जवाब देने का अधिकार सुरक्षित है। वहीं, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इस पर चुप्पी साध ली है, जबकि व्हाइट हाउस ने संक्षिप्त बयान में कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भविष्य की कार्रवाई के लिए सभी विकल्प खुले हुए हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि खाड़ी देशों के बीच आपसी तनाव अभी भी चरम पर है।
ईरान पर नाकेबंदी और शांति प्रयासों की स्थिति
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए बड़े हमलों के बाद क्षेत्र में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। हालांकि 7 अप्रैल को दो सप्ताह के संघर्ष विराम की घोषणा की गई थी, लेकिन इस्लामाबाद में हुई कूटनीतिक बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की कड़ी सैन्य नाकेबंदी शुरू कर दी है, जो वर्तमान में भी जारी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संघर्ष विराम की अवधि को आगे बढ़ाया है ताकि ईरान पर शांति प्रस्ताव लाने का दबाव बनाया जा सके।
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