उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिली रफ्तार, GST संग्रह में 13 फीसदी इजाफा
लखनऊ: मंदी और आर्थिक चुनौतियों के बीच उत्तर प्रदेश ने टैक्स कलेक्शन के मोर्चे पर पूरे देश में अपनी बादशाहत साबित की है। मई महीने के दौरान जहां राष्ट्रीय स्तर पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के संग्रह में तीन फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, वहीं उत्तर प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के सबसे तेजी से बढ़ने वाले बड़े राज्य का तमगा हासिल कर लिया है।
मई में यूपी ने दर्ज की रिकॉर्ड 13% की ग्रोथ
मई महीने में उत्तर प्रदेश का कुल जीएसटी संग्रह (SGST + CGST + IGST) बढ़कर 8,728 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह आंकड़ा पिछले साल इसी महीने के मुकाबले पूरे 13 फीसदी अधिक है। उत्तर प्रदेश की यह छलांग इसलिए भी बड़ी है क्योंकि देश के अन्य बड़े और औद्योगिक राज्य इस दौरान पिछड़ते नजर आए:
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गिरावट वाले राज्य: उत्तराखंड में 19%, तमिलनाडु में 15%, राजस्थान में 11% और बिहार में 7% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
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सुस्त रफ्तार वाले राज्य: महाराष्ट्र की ग्रोथ शून्य रही, जबकि गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्य सिर्फ 1% की मामूली बढ़त ही हासिल कर सके।
नेट जीएसटी कलेक्शन में देश में दूसरे पायदान पर पहुंचा यूपी
वास्तविक राजस्व का आकलन करने वाले 'शुद्ध जीएसटी संग्रह' (रिफंड घटाने के बाद वास्तविक प्राप्त राशि) के मामले में भी यूपी ने इतिहास रच दिया है। एसजीएसटी और आईजीएसटी सेटलमेंट को जोड़ने और केंद्र से मिले रिफंड को एडजस्ट करने के बाद उत्तर प्रदेश का नेट जीएसटी कलेक्शन 17,169 करोड़ रुपये रहा। इसके साथ ही यूपी देश में दूसरे स्थान पर आ गया है। इस सूची में महाराष्ट्र (36,825 करोड़ रुपये) पहले और कर्नाटक (16,177 करोड़ रुपये) तीसरे स्थान पर है।
राष्ट्रीय ट्रेंड के उलट यूपी की बड़ी छलांग राज्य कर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि पहले राज्य कर विभाग की ग्रोथ राष्ट्रीय औसत के मुकाबले कम रहती थी। लेकिन इस बार जहां ऑल इंडिया ट्रेंड माइनस तीन (-3%) फीसदी रहा, वहीं यूपी ने डबल डिजिट (13%) की मजबूत ग्रोथ हासिल कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है।
उपभोक्ता बने ताकत, छोटे व्यापारियों को मिल रही सहूलियत
अधिकारियों के मुताबिक, राज्य के जागरूक उपभोक्ता ही इस बड़ी सफलता की मुख्य ताकत बनकर उभरे हैं। विभाग अब मुख्य रूप से उन बड़े कारोबारियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जो टैक्स देने की क्षमता रखते हैं, जबकि छोटे और मंझोले व्यापारियों को लगातार प्रशासनिक सहूलियतें दी जा रही हैं। यही वजह है कि राज्य में नए टैक्सपेयर्स की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
एसजीएसटी (SGST) संग्रह में भी दिखाया दम
राज्य के अपने कर संग्रह यानी एसजीएसटी में भी उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन बेहद दमदार रहा। मई 2026 में प्रदेश का एसजीएसटी संग्रह 3,070 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 9 फीसदी ज्यादा है। हालांकि कुल रकम के मामले में महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात आगे जरूर हैं, लेकिन अगर विकास दर (Growth Rate) की बात की जाए, तो यूपी ने इन सभी दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है।
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